Valedictory of Teaching Practice – JCD PG College of Education

जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय के छात्र अध्यापक एवं अध्यापिकाओं का शिक्षण अभ्यास सत्र का समापन

सिरसा 04 जुन, 2022 जेसीडी विद्यापीठ में स्थापित शिक्षण महाविद्यालय में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बी.एड. ‘सामान्य एवं स्पैशल के विद्यार्थियों का विभिन्न स्कूलों में चल रहे शिक्षण अभ्यास कार्यक्रम का विधिवत् रूप से सिरसा जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, वैदवाला, राजकीय हाई स्कूल सिकंदरपुर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, नेजाडेला कलां, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पनिहारी, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सिरसा, राजकीय उच्च विद्यालय, कीर्ति नगर, सिरसा, न्यू सतलुज पब्लिक स्कूल, सिरसा में समापन किया गया। जिसमें छात्र-अध्यापकों ने स्कूली छात्र-छात्राओं को पढ़ाकर शिक्षण के गुर सीखे। इस मौके पर स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ-साथ छात्र-अध्यापक एवं अध्यापिकाओं ने भी अपनी प्रस्तुति दी। इन सभी स्कूलों में समापन कार्यक्रमों में बतौर मुख्यातिथि जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश उपस्थित हुए। इस मौके पर राजकीय हाई स्कूल सिकंदरपुर के हेड मास्टर रवेल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अध्यापक की समाज में अह्म भूमिका होती है। अध्यापक वर्ग राष्ट्र निर्माण में अपने कर्तव्य को समझते हुए अपने दायित्व को बखूबी निभाए तो समाज का भला हो सकता है। इस मौके पर श्रीराम न्यू सतलुज स्कूल की निदेशिका शशि सचदेवा ने कहा कि समय परिवर्तनशील है तथा प्रत्येक व्यक्ति को उसके अनुसार स्वयं को अपडेट करके कार्य करते हुए आगे बढऩा चाहिए। इस मौके पर राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल वैदवाला की प्रिंसिपल गुरवंत कौर ने छात्र अध्यापक एवं अध्यापिकाओं को कहा कि वे स्कूलों में प्राप्त हुए अपने अध्यापन सम्बन्धी नवीनतम तथा आधुनिक विधियों को अध्यापक लगने पर विभिन्न स्कूलों में अवश्य प्रयोग करें ताकि उनके शिक्षण कार्य में और अधिक गुणवत्ता आ सके।

प्राचार्य डॉ. जय प्रकाश ने कहा कि हमारा उद्देश्य हमारे विद्यार्थियों को बेहतर ज्ञान के साथ साथ उन्हें बेहतर सीखने हेतु सदैव प्रयास करते रहते हैं, जिसमें यह शिक्षण अभ्यास भी एक अह्म प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से भावी शिक्षकों को शिक्षण के गुर सीखने को मिलते हैं जो आगे चलकर इन्हें काफी लाभ प्रदान करते हैं। शिक्षण अभ्यास का मुख्य उद्देश्य छात्र शिक्षकों के बीच रचनात्मकता को विकसित करने के साथ-साथ शिक्षण सीखने की प्रक्रिया में शिक्षण सहायता सामग्री के महत्व के बारे में जागरूक करना था। गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा के विचार को साकार रूप देने के लिए ऐसे शैक्षिक कार्यक्रम एवं अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है जो शिक्षकों में बच्चों की समझ‚ शिक्षा की समझ‚ समस्याओं को पहचानने तथा विभिन्न समकालीन चुनौतियों पर चिंतन कर उन पर विजय प्राप्त कर सकने में मदद कर सके। उन्होंने सभी स्कूलों के मुख्याध्यापकों एवं प्रशासन का आभार प्रकट किया क्योंकि उनके सहयोग से हीइस शिक्षण अभ्यास को करवाया जा सका है।

जननायक चौधरी देवीलाल विद्यापीठ के प्रबंध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा ने भावी–अध्यापकों को आशीर्वाद व शुभकामनाएं देते हुए एक शिक्षक के रूप में अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि शिक्षक स्कूली व्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है अतः इस बदलते हुए शैक्षिक परिदृश्य में यह आवश्यक हो जाता है कि एक शिक्षक इस समय को आत्मसात कर शिक्षण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनें। ऐसे में यह अनिवार्य हो जाता है कि हम अपने सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों को न केवल शिक्षक बनने के लिए आमंत्रित करें, वरन् उन्हें उपयुक्त प्रशिक्षण भी दें। हमारा नजरिया शिकायतवादी रहता है। इस नजरिये को छोडि़ए और अपनी असाधारण क्षमताओं को पहचानिए। आप इस जिंदगी में एक खास मकसद को पूरा करें। जब हम यह तय कर लेते हैं कि हमें क्या और क्यों करना है तो उत्साह, लगन और परिश्रम अपने आप आ जाता है। इस अवसर पर शिक्षण महाविद्यालय के शिक्षकशिक्षकों सहित समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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