International Seminar cum Webinar JCD College of Education Dated 19-06-2021

जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय, सिरसा में एक दिवसीय ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

सिरसा (19-06-2021) जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय, सिरसा में ‘कोविड-19 महामारी काल में बहुविषयक शिक्षाशास्त्र के उपागमों का प्रयोग एवं भावी शिक्षक का ऑनलाइन प्रशिक्षण से संबंधित तैयारी’ हेतु ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्यातिथि जननायक चौ० देवीलाल विद्यापीठ के प्रबंध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा ने शिरकत की, वहीं इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश द्वारा की गई। ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबिनार में मुख्य वक्ता डॉ. वेरोनिका स्टोफोवा, प्रो. शिक्षा संकाय, ट्रानवा विश्वविद्यालय, ट्रानवा (स्लोवाकिया) वक्ता प्रो. (डॉ.) आर.एस. दलाल, केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ (हरियाणा), प्रो. (डॉ.) निवेदिता, अध्यक्ष, शिक्षा विभाग, सीडीएलयू, सिरसा (हरियाणा), प्रो. (डॉ.) सुषमा शर्मा सेवानिवृत्त अध्यक्ष, शिक्षा विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) एवं डॉ. प्रमोद कुमार, डीन, स्कूल ऑफ एजुकेशन, केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) रहें।

अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार के आयोजन सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार ने सर्वप्रथम सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का ऑनलाइन कार्यक्रम में जुड़ने पर पर उनका स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कोरोना महामारी से स्वयं को सुरक्षित रखने हेतु ऑनलाइन एजुकेशन की आवश्यकता है। कोरोना वायरस की वजह से हमारे जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं, ना केवल हमारे निजी जीवन पर बल्कि हमारे रिश्तों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। अपने देश की परिस्थिति, जीवन मूल्यों, और अपनी संस्कृति को समझते हुए एक स्वदेशी सिस्टम विकसित करने की चुनौती हमारे सामने है।

ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार के प्रातः कालीन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) निवेदिता ने कहा कि तकनीकी विकास के चलते इंसानी जिंदगी के सभी आयामों में विलक्षण परिवर्तन हुए हैं। और ये बदलाव न केवल मात्रात्मक विस्तार के रूप में हुए, बल्कि गुणात्मक भी हुए हैं इनका लाभ लोगों ने भरपूर उठाया है। प्रातः कालीन सत्र में 29 शोधार्थियों ने अपने शोध पेपर प्रस्तुत किए।

कॉलेज के प्राचार्य एवं ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार के संयोजक डॉ. जयप्रकाश ने सर्वप्रथम सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का ऑनलाइन कार्यक्रम में जुड़ने पर पर उनका स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कोरोना महामारी से स्वयं को सुरक्षित रखने हेतु ऑनलाइन एजुकेशन की आवश्यकता है। कोरोना वायरस की वजह से हमारे जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं, ना केवल हमारे निजी जीवन पर बल्कि हमारे रिश्तों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। अपने देश की परिस्थिति, जीवन मूल्यों, और अपनी संस्कृति को समझते हुए एक स्वदेशी सिस्टम विकसित करने की चुनौती हमारे सामने है।डॉ. जयप्रकाश ने अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार के उद्देश्यों के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि कोरोना महामारी के कारण शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के सामने आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार का आयोजन किया गया है। इसके लिए यूरोप और एशिया से शिक्षा और कंप्यूटर विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और विशेष शिक्षा जैसे अन्य विषयों में अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय ख्याति के अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। यह अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार विशेषज्ञ को एक मंच प्रदान करेगा जहां वे अपने-अपने क्षेत्रों में गहराई से विचार-मंथन करेंगे। इस अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में इस बात पर भी चर्चा होगी कि कोरोना के इस समय में हम विभिन्न डिजिटल संसाधनों का उपयोग करके भविष्य के शिक्षकों को कैसे तैयार कर सकते हैं और वे विभिन्न डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा कैसे देते हैं। ऑनलाइन शिक्षण और दूरस्थ शिक्षा का लाभ कैसे प्राप्त किया जाए, इस पर गहन विचार-विमर्श होगा क्योंकि कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के बिना छात्रों को शिक्षित करने का कोई दूसरा तरीका नहीं है।

मुख्यातिथि डॉ. शमीम शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि कोवीड–19 की वैश्विक त्रासदी के दौर में आमने- सामने की पारंपरिक शिक्षा के सामने कठिनाई खड़ी हो गई है। कोरोना संकट के दौर में शैक्षणिक संस्थानों के आगे जो चुनौती है उसमें ऑनलाइन एक स्वाभाविक विकल्प है। ऐसे समय में विद्यार्थियों से जुड़ना समय की ज़रूरत है, लेकिन इस व्यवस्था को कक्षाओं में आमने-सामने दी जाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकल्प बताना भारत के भविष्य के लिए अन्यायपूर्ण है। कोवीड–19 लॉकडाउन ने हमें विशेष रूप से स्कूल व कॉलेज स्तर की शिक्षा प्रणाली में ई-लर्निंग की एक नई चुनौती दी है। महामारी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिये लागू किये गए लॉकडाउन के कारण स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही है। परिणामस्वरूप शिक्षा अब तेज़ी से ई-शिक्षा की ओर अग्रसर हो रही है। भारत में आनलाइन शिक्षा के समाने बहुत सारी चुनौतियां मूंह बाये खड़ी हैं। ऑनलाइन शिक्षा के लिए गुणवत्ता तंत्र और गुणवत्ता बेंचमार्क स्थापित करना भी महत्वपूर्ण है। कई ई-लर्निंग मंच एक ही विषय पर कई पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। इसलिए, विभिन्न ई-लर्निंग प्लेटफार्मों में पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता भिन्न हो सकती है। तकनीक का असमय फेल होना जैसे इंटरनेट की स्पीड, कनेक्टिविटी की समस्या, लॉक डाउन के समय में कोई साथ उपस्थित होकर सिखाने एवं बताने वाला नहीं होने से भी ऑनलाइन ट्यूटोरियल की सहायता से ही सीखने की मजबूरी, घर में जो साधन है उन्हीं की सहायता से लेक्चर तैयार करना उसे रिकॉर्ड करना, नोट्स बनाना उनकी डिजिटल कॉपी तैयार करना, स्टडी मटेरियल खोजना एवं पाठ्यक्रम के अनुरूप उसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करना, छात्र-छात्राओं से संवाद करना आदि अनेकों नई प्रकार की चुनौतियां शिक्षा समुदाय के समक्ष हैं प्रौद्योगिकी का डेमोक्रेटाइजेशन अब एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसमें इंटरनेट कनेक्टिविटी, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑनलाइन सिस्टम की क्षमता, लैपटॉप / डेस्कटॉप की उपलब्धता, सॉफ्टवेयर, शैक्षिक उपकरण, ऑनलाइन मूल्यांकन उपकरण आदि शामिल हैं।

ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबिनार में मुख्य वक्ता डॉ. वेरोनिका स्टोफोवा ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है जोकि बिल्कुल भी गलत नहीं है। यह इस बात से काफी अच्छी तरह स्पष्ट हो जाता है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज अपने कोर्सेज को आसान और किफायती बनाने के साथ-साथ व्यापक रूप से अपने कोर्सेज अधिक से अधिक छात्रों को उपलब्ध करवाने के विकल्प तलाश रहे हैं। अध्यापन कोई स्थिर व्यवसाय नहीं है बल्कि प्रौद्योगिकी, सदैव बदलते ज्ञान, वैश्विक अर्थशास्त्र के दबावों और सामाजिक दबावों से प्रभावित होकर बदलता रहता है। इसका मतलब है कि इन परिवर्तनों को संबोधित करने के लिए अध्यापन के तरीकों और कौशलों का लगातार अद्यतन और विकास आवश्यक है। शिक्षकों का बदलाव की क्षमता से युक्त होना अनिर्वाय है। शिक्षक, योजनाकार, शोधकर्ता आदि सभी लोग व्यापक पैमाने पर इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि ऑनलाइन शिक्षा से शिक्षा पर सकारात्मक और महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमताएं मौजूद हैं। केवल आईसीटी के अस्तित्व में होने से ही शिक्षकों की पद्धति नहीं बदलेगी। हालांकि, आईसीटी शिक्षकों को अपने शिक्षण पद्धति को बदलने तथा अधिक सक्षमता प्राप्त करने में मदद कर सकती है, बशर्ते आवश्यक स्थितियां उपलब्ध करा दी जाएं। शिक्षकों की शैक्षणिक पद्धतियां और तार्किकता उनके द्वारा आईसीटी के उपयोग को प्रभावित करती है, और शिक्षक द्वारा आईसीटी के उपयोग की प्रकृति छात्र की उपलब्धि को प्रभावित करती है।

प्रो. (डॉ.) सुषमा शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि आईसीटी का उपयोग करने के लिए ज्ञान और कौशल अपर्याप्त हैं। कोवीड–19 महामारी के प्रकोप के दौरान दूरस्थ-शिक्षण अवधि के दौरान प्रदर्शित किया गया भविष्य् की प्रौद्योगिकी के बारे में शिक्षा से जुड़े लोगों और नीति-निर्माताओं को जागरूक करना ताकि वे भविष्य के हिसाब से अपनी योजनाएं बना सकें, न सिर्फ उस आधार पर जो आज उपलब्धा है, बल्कि आने वाली कल की नई-नई चीज़ों को ध्या न में रखते हुए।

डॉ. प्रमोद कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि विश्वव्यापी लॉकडाउन के बीच तमाम देशों में ऑनलाइन कक्षाओं और इंटरनेट से पढ़ाई पर जोर है भारत भी इससे अछूता नहीं है। कोवीड–19 में आज स्मार्टफ़ोन, लैपटॉप, टीवी वग़ैरह को आपस में साझा करने के विकल्प भी आज़माए जा रहे हैं लेकिन अगर एक छात्र भी ऑनलाइन शिक्षा के दायरे से बाहर रह जाता है तो ये उसके साथ नाइंसाफ़ी होगी। ऑनलाइन लर्निग के तहत वर्चुअल कक्षाएं और वीडियो-ऑडियो सामग्री, प्रस्तुतियां, पाठ्यक्रम और ट्युटोरियल तो हैं ही, वेबिनार, मॉक टेस्ट, वीडियो और काउंसलिंग आदि की विधियां भी ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं जैसे मुद्दे सामने हैं।

ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार के संध्या कालीन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) आर.एस. दलाल ने कहा कि शिक्षा अपने मूल में सामाजीकरण की एक प्रक्रिया है. जब-जब समाज का स्वरूप बदला शिक्षा के स्वरूप में भी परिवर्तन की बात हुई। आज कोरोना संकट के दौर में ऑनलाइन शिक्षा के जरिये शिक्षा के स्वरूप में बदलाव का प्रस्ताव नीति निर्धारकों के द्वारा पुरजोर तरीके से रखा जा रहा है।कोरोना संकट के दौर में शैक्षणिक संस्थानों के आगे जो चुनौती है उसमें ऑनलाइन एक स्वाभाविक विकल्प है. ऐसे समय में विद्यार्थियों से जुड़ना समय की ज़रूरत है। संध्या कालीन में 50 शोधार्थियों ने अपने शोध पेपर प्रस्तुत किए।

इस ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार में अनेक शोधार्थियों ने अपने शोध पेपर प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार कॉम वेबीनार के आयोजन सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों व प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

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