Inauguration of International Conference

जेसीडी विद्यापीठ में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन ।
विज्ञान और तकनीकी दुनिया को बहुत तेज गति से बदल रही है।: डॉ. सुदेश छिकारा

सिरसा 27 मई 2023, जननायक चौ. देवीलाल विद्यापीठ, सिरसा में स्थित शिक्षण महाविद्यालय के सभागार कक्ष में दो दिवसीय तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘बहु विषय क्षेत्र में संकायों के व्यावसायिक विकास में उभरते रुझान और शोध’ विषय का विधिवत् उद्घाटन किया गया। इस तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सुदेश छिकारा एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यापीठ के महानिदेशक एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप सिंह ढींडसा ने शिरकत की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय की फैकल्टी ऑफ एजुकेशन की प्रोफेसर डॉ. वन्दना पुनिया, मुख्य वक्ता बयारो यूनिवर्सिटी कानो नाइजीरिया के प्रोफेसर लवण सानी मूसा एवं कादुना स्टेट यूनिवर्सिटी नाइजीरिया के प्रोफेसर नूरा याकुबू, विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. सुधांशु गुप्ता, एम. एम. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गुरचरण दास, जेसीडी विद्यापीठ के कॉलेजेस के प्रचार्यगण अनुपमा सेतिया , डॉक्टर शिखा गोयल ,डॉक्टर हरलीन कौर के इलावा एम.डी. यू से डॉ. राजेश मलिक, कान्फ्रेंस वर्ल्ड से कुनाल, शिक्षण महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, विभिन्न राज्यों से आएं प्रतिभागी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें। कार्यक्रम का उद्घाटन मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित व सोवनियर का विमोचन करके किया गया।

शिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य एवं तृतीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक डॉ. जयप्रकाश ने मुख्य अतिथि व अन्य आएं हुए अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए उनका परिचय दिया और तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के महत्व एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्यापीठ के महानिदेशक एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप सिंह ढींडसा ने अपने वक्तव्य में तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन की शोभा बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. सुदेश छिकारा के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि कल की तकनीक के लिए हमें आज विज्ञान में निवेश करने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन के बारे में गंभीरता से सोचने का यह सही समय है। विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का एक हिस्सा है और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवीनतम विकास और उन्नति हमारे जीवन को सकारात्मक रूप से बदल रही है। उन्होंने कहा कि हमें बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार करना महत्वपूर्ण है। हमें दुनिया में सर्वश्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए मानक स्थापित करने चाहिए। विज्ञान हमारी वह सोच और जिज्ञासा है, जो अवलोकन के बाद हमारे दिमाग में आती है। यह बहुत ही जरुरी है कि हम अपने दिमाग में आने वाले विचारों के अनुसार काम करें। ये ही हमें नयी तकनीक के अविष्कार को जन्म देता है। इसलिए प्रौद्योगिकी को विज्ञान का अनुप्रयोग कहा जा सकता है। उन्होंने तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता के लिए आयोजन कर्ताओं को हार्दिक शुभकामनाएं दी। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ कुलदीप सिंह ढींडसा ने खुद इस इंटरनेशनल कांफ्रेंस में पेपर प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवीनतम विकास पर पेपर प्रेजेंट किया । उन्होंने कोविड-19 में भारत द्वारा विकसित की गई वैक्सीन के लिए भारत के विज्ञान की सराहना की। डा. कुलदीप सिंह ढींडसा ने कहा कि कल की तकनीक के लिए हमें आज विज्ञान में निवेश करने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन के बारे में गंभीरता से सोचने का यह सही समय है। विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का एक हिस्सा है और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवीनतम विकास और उन्नति हमारे जीवन को सकारात्मक रूप से बदल रही है और अद्यतन कर रही है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुदेश छिकारा ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान और तकनीक दुनिया को बहुत तेज गति से बदल रही है। यह परिवर्तन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। शिक्षण संकाय को अद्यतन होना चाहिए और नवीनतम रुझानों और प्रौद्योगिकी के साथ सहज होना चाहिए। अब शिक्षण प्रक्रिया नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार छात्र केंद्रित है। जब दुनिया कोविड -19 संकट से बाहर आ रही है, तो एक नई वैश्विक व्यवस्था आकार ले रही है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाएं भारत की ओर आशा के साथ देख रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की जीवन रेखा है और इस प्रकार विश्व में भारत की स्थिति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-एनईपी के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, 21वीं सदी की शिक्षा प्रणाली के लिए रूपरेखा तैयार करती है और शिक्षा और कौशल के बीच तालमेल एक नई व्यवस्था बना रही है। डॉ. छिकारा ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका सूत्रधार के रूप में होती है। कृत्रिम बुद्धि का प्रभाव से बहु-विषयक डोमेन के लिए अधिक अवसर हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. वन्दना पुनिया ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक परिवर्तन से मानवीय गतिविधियों और क्रिया-कलापों के कारण दुनिया का तापमान बढ़ रहा है और इससे जलवायु में होता जा रहा परिवर्तन अब मानव जीवन के हर पहलू के लिए ख़तरा बन चुका है। इसका प्रभाव शिक्षा के क्षेत्र पर भी देखने को मिला है। डॉ.पुनिया ने कहा कि हमें एक नई तकनीक विकसित करने के लिए हमें विचार और अपने ज्ञान और सोच पर काम करने की आवश्यकता है। विज्ञान उन तथ्यों और ज्ञान को सही साबित करने के लिए है जो तथ्य और तकनिकी में सहायक होती है।

मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बयारो यूनिवर्सिटी कानो नाइजीरिया के प्रोफेसर लवण सानी मूसा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया और सीखना चारों ओर के परिवेश से अनुकूलन में सहायता करता है। किसी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में कुछ समय रहने के पश्चात् हम उस समाज के नियमों को समझ जाते हैं और यही हमसे अपेक्षित भी होता है। हम परिवार, समाज और अपने कार्यक्षे त्र के जिम्मे दार नागरिक एवं सदस्य बन जाते हैं। यह सब सीखने के कारण ही सम्भव है। हम विभिन्न प्रकार के कौशलों को अर्जित करने के लिये सीखने का ही प्रयोग करते हैं।

कार्यक्रम के अन्त में अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजन सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार ने आएं हुए अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।

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